March 6, 2026
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काशीपुर। भाजपा नगर मंडल के पूर्व अध्यक्ष अभिषेक गोयल ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी ही नहीं, एक महान शिक्षाविद्, देशभक्त, राजनेता, सांसद, अदम्य साहस के धनी और सहृदय और मानवतावादी थे। उन्होंने स्व. मुखर्जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रवादी महापुरूष डॉ. मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। उस समय जम्मू कश्मीर का अलग झंडा था, अलग संविधान था, वहां का मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री कहलाता था। डॉ. मुखर्जी ने जोरदार नारा बुलंद किया कि एक देश में दो निशान, एक देश में दो प्रधान, एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगें। संसद में अपने ऐतिहासिक व ओजस्वी भाषण में डॉ. मुखर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊंगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपना जीवन बलिदान कर दूंगा। उन्होंने तत्कालीन नेहरू सरकार को चुनौती दी तथा अपने दृढ़ निश्चय पर अटल रहे। अपने संकल्प को पूरा करने के लिए वे 1953 में बिना परमिट लिए जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े, जहाँं उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर लिया गया। परंतु 23 जून को खबर आई कि वह अपने शरीर को त्याग चुके हैं जिसके कारण पूरा भारत गमगीन हो गया ऐसे तेजस्वी महापुरुष को याद करते हुए आज की युवा पीढ़ी को महान त्यागवान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।

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