काशीपुर। घर में काम करने वाली नौकरानी के विरूद्ध दाखिल परिवाद अदालत ने खारिजकर दिया। नई सब्जी मंडी, शक्तिनगर, काशीपुर निवासी सोनल सिंघल पत्नि सन्दीप सिंघल द्वारा अपने घर में काम करने वाली नौकरानी रमाकान्ति उर्फ सुमन पत्नि विनोद कुमार वर्मा, निवासी काली मन्दिर, शर्मा आटा चक्की के पास, काशीपुर के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर कर कहा कि रमा उर्फ सुमन घरों में खाना बनाने का काम करती है। सुमन के तीन बच्चे हैं। उसके बच्चों की स्कूल की फीस जमा नहीं हो पा रही थी। बच्चों के भविष्य की खातिर उसके द्वारा स्कूल में बात करके 50 हजार रुपये जमा करके रसीद प्राप्त कर ली गई। 50 हजार रुपये में से 25 हजार रुपये उसने नकद दिये और सुमन ने वादा किया कि वह 1,200 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से 25 हजार रुपये धीरे-धीरे चुका देगी, परन्तु कुछ समय बाद रमा उर्फ सुमन ने खाना बनाना बन्द कर दिया। अक्टूबर 2024 में उसने कहा कि मैं खाना बनाने नहीं आऊंगी। चाहे 25 हजार रुपये का केस डालो या 50 हजार रुपये का केस डालो, जबकि वह पड़ोस के घर में काम करने आती रही। पैसे न देने के कारण सुमन पर सोनल सिंघल ने धारा 316 (1), 318(4), 351 (1) (2) बीएनएस में मुकदमा अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट काशीपुर के यहां दाखिल किया। उक्त मुकदमे के विरोध में अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल ने बहस की। उनके द्वारा कहा गया कि यदि खाना बनाने वाली कोई नौकरानी खाना नहीं बना रही है, तो यह अपराध नहीं है, यह व्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार है और इनमें कोई आपराधिक मामला नहीं बनता। अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल की बहस व तर्कों से संतुष्ट होकर न्यायालय ने सोनल सिंघल का परिवाद खारिज कर दिया।

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