काशीपुर। मानपुर रोड स्थित कौशाम्बी कालौनी निवासी देवेंद्र शर्मा का आकस्मिक देहावसान हो गया। श्री शर्मा के देहावसान के पश्चात उनके पुत्र कमल शर्मा एवं पवन शर्मा ने देहदान व नेत्रदान की सहमति प्रदान कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। सोमवार को देवेंद्र शर्मा के परिवार जन ने वसुधैव कुटुम्बकम् काशीपुर से संपर्क कर उनके देहदान व नेत्रदान की इच्छा व्यक्त की। वसुधैव कुटुम्बकम् के संस्थापक सदस्यों की उपस्थिति में कागजी औपचारिकता पूरी कर नेत्रदान व देहदान की प्रकिया सम्पन्न हुई। संस्था के उपस्थित दायित्व धारियों ने बताया कि देहदान महर्षि दधीचि की महान परम्परा है । संस्था का एक वर्ष में 20वां नेत्रदान संपन्न हुआ है । इस दुःख की घड़ी पर संस्था के संस्थापक सदस्य अजय अग्रवाल, प्रियांशु बंसल, सीए सचिन अग्रवाल ने उपस्थित रहते हुए महादानी परिवार के प्रति आभार प्रकट किया व ईश्वर से दिवंगत आत्मा की चिर शांति की कामना की। इस देहदान व नेत्रदान में समाजसेवी व ब्राह्मण सभा से शैलेंद्र शर्मा, चक्रेश जैन, एडवोकेट आनंद रस्तोगी, नीरज अग्रवाल का विशेष योगदान रहा ।
देहदान एक महान और परोपकारी कार्य है, जिसमें व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद अपने शरीर को चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए दान करता है। यह कार्य न केवल चिकित्सा विज्ञान की प्रगति में मदद करता है, बल्कि यह एक व्यक्ति के जीवन को भी सार्थक बना सकता है।
देहदान के कई लाभ हो सकते हैं, जैसे-
1. चिकित्सा शिक्षा में मदद : देहदान से चिकित्सा छात्रों को मानव शरीर की संरचना और कार्य को समझने में मदद मिलती है।
2. अनुसंधान में योगदान : देहदान से वैज्ञानिक अनुसंधान में मदद मिलती है, जिससे नए उपचार और चिकित्सा पद्धतियों का विकास हो सकता है।
3. समाज सेवा : देहदान एक समाजसेवी कार्य है, जिससे व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी समाज को लाभ पहुंच सकता है।
यदि आप देहदान के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं या देहदान करना चाहते हैं, तो वसुधैव कुटुम्बकम् संस्था से
24×7📲 9837080678,9548799947
से संपर्क कर सकते हैं।

सह संपादक मानव गरिमा
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