काशीपुर। एक नवंबर की रात गुरुदत्त बाठला के देहावसान के पश्चात उनके सुपुत्र श्यामलाल बाठला, राजेश बाठला एवं संजीव बाठला ने नेत्रदान की सहमति प्रदान कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। समाज सेवा एवं धार्मिक कार्यों में संलग्न रहे गुरुदत्त बाठला के नेत्रदान से दो नेत्रहीनों के नेत्र प्रकाशित होंगे और उनके प्रिय जन उनकी स्मृति को अमरत्व प्रदान करेंगे। वसुधैव कुटुम्बकम काशीपुर के दायित्वधारियों की उपस्थिति में रुद्रपुर से आई टीम ने कागजी औपचारिकता पूरी कर ब्रह्मलीन गुरुदत्त बाठला के शरीर से दान की गई आंख की ऊपरी परत (कॉर्निया) प्राप्त कीं।
वसुधैव कुटुम्बकम् काशीपुर के सदस्य अक्षत बंसल ने बताया कि वसुधैव कुटुम्बकम् क्षेत्र के लोगों में नेत्रदान हेतु जागृति लाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि बहुत से लोग सोचते हैं कि नेत्रदान के दौरान पूरी आंख निकाल दी जाती है, जिससे आंख का सॉकेट खाली रहता है, जो सच नहीं है। सामान्यतः केवल कॉर्निया जो आंख की सबसे बाहरी परत होती है, आसानी से निकाली जाती है व नेत्रदान करने से किसी प्रकार का देह भंग नही होता। उन्होंने ये भी बताया कि नेत्रदान करवाने के लिए वसुधैब कुटुम्बकम् के नेत्रदान सहायता हेतु (24×7)
98370 80678 या 9548799947 पर किसी भी समय संपर्क किया जा सकता है। वसुधैव कुटुंबकम् काशीपुर के तत्वाधान में सम्पन्न इस महान कार्य के प्रति उपस्थित संस्थापक सदस्य सीए सचिन अग्रवाल ने नेत्रदानी बाठला परिवार का आभार व्यक्त किया और परम पिता परमेश्वर से दिवंगत आत्मा की चिर शांति की प्रार्थना की तथा क्षेत्र वासियों से मरणोपरांत नेत्रदान कराने में सहयोग का आह्वान किया।

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