March 6, 2026
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काशीपुर। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मनोज गर्ब्यांल की अदालत ने बहुचर्चित मां-बेटा हत्याकांड के मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही तेजाब के इस्तेमाल जैसे क्रूर अपराध के लिए 12 वर्ष का कठोर कारावास और 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। 17 जून 2016 को समाजसेवी एवं अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल ने थाना काशीपुर में तहरीर देकर बताया था कि काशीपुर के मौहल्ला लाहौरियान निवासी शंकुतला पत्नी कृष्णा चन्द्र सैनी एवं उनका बेटा कलश उर्फ बबी पिछले कई दिनों से लापता हैं और मोहल्ले के लोगों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। यह विषय समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ है, परन्तु कोई भी मोहल्ले वाला अपने स्वयं के नाम से यह बात पुलिस से कहने से डर रहा है। बताया गया कि महिला कई संपत्तियों की मालकिन है। लोग शकुन्तला को गायब करने के पीछे एक प्रापर्टी डीलर और उसके मकान में किराए पर रहे लोगों का नाम ले रहे हैं। मामले में पुलिस ने प्राथमिकी पंजीकृत कर जांच शुरू की। इसके बाद आरोपी प्रेम अवतार शर्मा, अजय शर्मा दोनों निवासी ग्राम सौदासपुर थाना डिलारी जिला मुरादाबाद उ.प्र. तथा ग्राम रामबलभद्रपुर थाना भगतपुर जिला मुरादाबाद उ.प्र. निवासी विक्रम यादव उर्फ राजू यादव को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता रतन सिंह कांबोज ने जो साक्ष्य प्रस्तुत किए, उसके आधार पर यह पूरी वारदात एक गहरी साजिश का नतीजा थी। दोषियों ने पीड़ितों को बालाजी के दर्शन कराने के बहाने कार में अगवा किया था। इसके बाद, सुनसान जगह पर ले जाकर उनकी नृशंस हत्या कर दी गई। दोषियों ने मृतकों की पहचान छुपाने और सबूत मिटाने के लिए उन पर तेजाब डाला। फैसला सुनाए जाने के तत्काल बाद, कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों की जमानतें निरस्त कर दीं। उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में लेते हुए जेल भेज दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आजीवन कारावास के साथ-साथ अन्य सभी कठोर सजाएं एक साथ चलेंगी।

यह था पूरा मामला : नगर के मौहल्ला लाहौरियान में शकुन्तला देवी अपने दत्तक पुत्र कलश के साथ रहती थीं। ग्राम सौदासपुर निवासी अजय शर्मा ने शकुन्तला से 18 लाख रुपये में मकान खरीदा। अजय ने 13 लाख रुपये का चेक दिया और शेष राशि बाद में देने का वादा किया। इसके बाद, अजय ने शकुन्तला से चेक वापस ले लिया और मां-बेटे को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। शकुन्तला के किरायेदार विक्रम सिंह को इस योजना में शामिल किया गया। 25 मार्च 2016 को विक्रम मां-बेटे को मुरादाबाद ले गया, जहां से प्रेम और अजय उन्हें स्विफ्ट डिजायर कार में बैठाकर मथुरा ले गए। वहां, नींद की गोली देकर दोनों की हत्या कर दी गई। शकुंतला देवी का शव खेत में और कलश का शव जंगल में फेंका गया। पुलिस ने मामले का खुलासा किया, जिसमें तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

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