March 6, 2026
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देहरादून। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पहले राज्य में इसे लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इसके लिए मौजूदा मतदाता सूची का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान किया जा रहा है। वर्ष 2003 के बाद दूसरे राज्यों से आकर यहां निवास करने और मतदाता बनने वालों का फिलहाल अलग डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल तब किया जाएगा जब राज्य में SIR शुरू हो जाएगा और केंद्र राज्य को दूसरे राज्यों की मतदाता सूची से मिलान करने की अनुमति दे देगा। राज्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय इस समय मतदाता सूची का मिलान करने में जुटा हुआ है। इसके लिए बीएलओ एप भी बनाया गया है। वर्ष 2025 की मतदाता सूची में यह देखा जा रहा है कि इनमें से कितने मतदाताओं का नाम 2003 की सूची में शामिल है। इनमें प्रदेश के अंदर भी स्थान बदलने वाले मतदाताओं के नाम भी देखे जा रहे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि वर्ष 2003 के बाद जो नए मतदाता बनें हैं उनके अभिभावकों के नाम भी मतदाता सूची में देखे जा रहे हैं। यह देखा जा है कि तत्समय वे कहां के मतदाता थे। यह सारा आंकड़ा बीएलओ एप में शामिल किया जा रहा है।        इस पूरी कवायद का मकसद SIR से पहले राज्य में रह रहे मतदाताओं एक मजबूत डाटा बेस तैयार करना है। जिन मतदाताओं के नाम इस डाटा बेस में शामिल होंगे उनके SIR के दौरान बहुत अधिक दस्तावेज नहीं देने होंगे और उनका नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाएगा। इसके साथ ही बाहर से आने वाले मतदाताओं का एक अलग डाटा बेस बनाया जा रहा है। यह देखा जा रहा है कि वे किस राज्य से आकर यहां मतदाता बनें है।जब राज्य में SIR शुरू होगा उस समय ऐसे मतदाताओं के नाम अथवा उनके अभिभावकों के नाम संबंधित राज्य की मतदाता सूची में तलाश किए जाएंगे। यह भी देखा जाएगा कि कहीं उनका नाम दूसरे राज्यों की मतदाता सूची में तो शामिल नहीं हैं। ऐसे में मतदाता की पहचान पुख्ता हो सकेगी।
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तूदास ने कहा कि अभी 2003 से मतदाता सूची का मिलान किया जा रहा है। इससे SIR शुरू होने के बाद मतदाता सूची तैयार करने में आसानी होगी। राज्य में SIR पूर्व की जा रही तैयारियां फर्जी मतदाताओं की पहचान करने में भी लाभदायक साबित होंगी। जब SIR शुरू होगा तो उस समय दूसरे राज्यों से आने वाले मतदाताओं का उनके राज्य की मतदाता सूची से मिलान किया जाएगा। जिस मतदाता का किसी भी राज्य में कोई इतिहास नहीं मिलेगा। उसे मतदाता सूची से बाहर करने में आसानी रहेगी। इससे राज्य में दूसरे देशों से आकर गलत तरीके से मतदाता बनने वालों की पहचान भी हो सकेगी।

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