March 6, 2026
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काशीपुर। विश्व एनीमिया जागरूकता दिवस के अवसर पर भारतीय बाल रोग अकादमी (आईएपी) के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता ने बच्चों में एनीमिया से जुड़े भ्रम को तोड़ने और वैज्ञानिक तथ्यों को जन-जन तक पहुंचाने का आहवान किया है। एनीमिया, विशेषकर आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया, एक रोकथाम योग्य और उपचार योग्य बीमारी होने के बावजूद आज भी भारत में बड़ी संख्या में बच्चों को प्रभावित कर रहा है। 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 60-70% बच्चे एनीमिया से ग्रस्त हैं, जिसका एक बड़ा कारण गलत धारणाएं, देर से पहचान और इलाज में लापरवाही है। उन्होंने एनीमिया से जुड़े आम भ्रम बताते हुए कहा कि इन्हें तोड़ना जरूरी है। बताया कि एनीमिया कोई छोटी समस्या नहीं है। वास्तव में यह बच्चे की वृद्धि, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और मस्तिष्क विकास को नुकसान पहुंचा सकता है। सिर्फ कमजोर या दुबले बच्चे ही एनीमिया से पीड़ित नहीं होते, स्वस्थ दिखने वाले बच्चे भी एनीमिक हो सकते हैं। आयरन की दवाइयां नुकसानदायक होती हैं।सही मात्रा में दी जाएं तो ये पूरी तरह सुरक्षित और जीवनरक्षक हैं। सिर्फ खान-पान से एनीमिया ठीक हो जाता है। मध्यम व गंभीर एनीमिया में आयरन सप्लीमेंट अनिवार्य है।हीमोग्लोबिन ठीक होते ही आयरन बंद किया जा सकता है। आयरन कम से कम 2-3 महीने तक जारी रखना जरूरी है, ताकि शरीर के भंडार भर सकें। डॉ. रवि सहोता ने इसकी महत्ता बताते हुए कहा कि शैशव और प्रारंभिक बाल्यावस्था में आयरन की कमी से सीखने की क्षमता, व्यवहार और स्कूल प्रदर्शन पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आईपीए उत्तराखंड अध्यक्ष डॉ. रवि सहोता ने अभिभावकों, शिक्षकों, स्वास्थ्य कर्मियों, अस्पतालों और मीडिया से अपील करते हुए कहा कि वे एनीमिया की समय पर जांच और इलाज को बढ़ावा दें।आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन का सही पालन सुनिश्चित करें। एनीमिया मुक्त भारत जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को मजबूत करें। समाज में फैले भ्रम दूर कर सही जानकारी फैलाएं। डॉ. रवि सहोता ने आहवान किया कि भ्रमों को तथ्यों से बदलें और सुनिश्चित करें-मजबूत रक्त, स्वस्थ बच्चे और सशक्त भारत।

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