काशीपुर। सिद्धपीठ श्री शीतला माता मंदिर में चैत्र मास की द्वितीया यानि आगामी कल शुक्रवार 6 मार्च से पूजा-अर्चना आरंभ होगी, जिसका समापन वैशाख शीतला अष्टमी (11 मार्च) को बसौड़ा पूजन के साथ किया जाएगा। विदित हो कि मां शीतला देवी नगर कोट देवी, महाकाली, तृष्णा, कालरात्रि, श्री चौगानन चौराहे वाली व मसानी माता के नाम से प्रसिद्ध हैं। मुख्य रूप से मां का अवतार रोग हरण के लिए है। इसलिए इन्हें मां शीतला देवी कहते हैं। ऋतु परिवर्तन से होने वाली बीमारियों से मुक्ति के लिए प्रतिवर्ष चैत्र मास की द्वितीया से यहां विशेष पूजा-अर्चना का प्रावधान है। इस दौरान मां को घर में बना भोजन अगले दिन बासी भोजन के रूप में अर्पित किया जाता है। मंदिर के प्रबंधक/पीठाधीश पं. संदीप मिश्रा ने बताया कि मां के हाथ में शस्त्र के रूप में झाडू व नीम है। झाडू घर में स्वच्छता और नीम रोग हरण का प्रतीक है। हल्दी औषधि है, जिससे माता का तिलक होता है। वहीं, संतान उत्पत्ति के सवा महीने बाद तथा विवाह से पूर्व और बाद में लोग मंदिर में मत्था टेकने आते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष शुक्रवार 6 मार्च से पूजा शुरू हो जाएगी। इसके बाद सोमवार 9 मार्च को वार पूजन होगा। जबकि 10 मार्च को शीतला सप्तमी और 11 मार्च को शीतला अष्टमी पर बसौड़ा पूजन किया जाएगा। पं. संदीप मिश्रा ने बताया कि बसौड़ा पूजन की मान्यता है कि मां कहती हैं कि बासी भोजन मुझे ग्रहण कराए और परिवार में आज से ताजा भोजन करें ताकि रोग मुक्त रहें। “मां शीतला देवी को हल्दी का तिलक लगाकर श्रद्धालु नारियल, कच्चा दूध, चना, मसूर दाल, हल्दी, गुड़, आटा, सरसों का तेल, नमक, झाडू आदि चढ़ा कर मां की पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं बासी भोग में पुए, पूरी, मीठे पराठे मां को अर्पित किए जाते हैं।”

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