काशीपुर। पथ विक्रेताओं (फड़, फेरी वाले) के अधिकारों के सरंक्षण तथा सड़क पर चलने व पथ विक्रेताओं के अधिकारों में सामंजस्य के लिये 01 मई 2014 से देश भर में शहरी क्षेत्रों में लागू कानून पथ विक्रेता अधिनियम 2014 के प्रावधानों का पालन उत्तराखण्ड में नहीं हो रहा है। सूचना अधिकार के अन्तर्गत कुमाऊं मंडल के सभी नगर निगमों द्वारा सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को उपलब्ध करायी गयी सूचना से इसका खुलासा हुआ। काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के सभी 5 नगर निगमों में उनके क्षेत्र में पथ विक्रेता अधिनियम के पालन के सम्बन्धी सूचना चाही थी इसके उत्तर में संबंधित निगमों के लोक सूचना अधिकारियों द्वारा उपलब्ध उत्तरों/सूचनाओं से पथ विक्रेता अधिनियम 2014 तथा इसके अन्तर्गत लागू उत्तराखंड पथ विक्रेता नियमावली 2016 के प्रावधानों का पालन न होना स्पष्ट होता है। सूचना अधिकार कार्यकर्ता तथा नगर निगम चुनाव कानून सहित 46 कानूनी तथा जागरूकता पुस्तकों के लेखक नदीम उद्दीने ने जानकारी दी कि अन्य सभी कानूनों के ऊपर लागू होने वाले पथ विक्रेता अधिनियम तथा सम्बन्धित उत्तराखंड नियमावली में पथ विक्रेताओं के सम्बन्ध में सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार 40 प्रतिशत फड़ फेरी वालों द्वारा उनमें से चुने गये प्रतिनिधियों वाली नगर फेरी समिति को है। इसके अतिरिक्त फड़-फेरी वालों से दैनिक तहबाजारी तथा ठेकेदार के माध्यम से तहबाजारी वसूलने पर पूर्ण प्रतिबंध हैं। श्री नदीम को नगर निगम हल्द्वानी काठगोदाम के लोेक सूचना अधिकारी ने पत्रांक 1862 के साथ उत्तराखंड नगरीय फेरी व्यवसायी (आजीविका सुरक्षा तथा फेरी व्यवसाय विनियमन नियमावली 2016 के प्रावधानों का विवरण भी उपलब्ध कराया है । इसके नियम 16(2) के अनुसार नगर फेरी समिति/स्थानीय निकाय द्वारा फेरी व्यवसायियों से किसी भी शुल्क की वसूली ठेकेे के आधार पर नहीं की जायेगी। नियम 17 में फेरी फड़ व्यवसायियों से लिये जाने वाले शुल्क का विवरण है इसमें नगर फेरी समिति द्वारा निर्धारित वार्षिक लाइसेंस शुल्क, मासिक आधार पर फेरी व्यवसाय शुल्क तथा नियम 18 में दी जाने वाली अतिरिक्त सेवाओं के लिये मासिक अनुरक्षण शुल्क/प्रभार लिये जाने का प्रावधान है। इस प्रकार न तो इनसे कोई दैनिक शुल्क वूसला जा सकता है और न ही ठेकेदार के माध्यम से किसी शुल्क की वसूली करायी जा सकती हैं। यदि ऐसा ठेका नगर निगम द्वारा किया जाता हैं तो वह गैर कानूनी होने के कारण शून्य होगा और लागू नहीं हो सकेगा। ऐसे अवैध रूप से वसूले गये शुल्क की वापसी भी नगर निगम को न्यायालय के आदेश पर करनी पड़ सकती है। पथ विक्रेता अधिनियम 2014 तथा उत्तराखंड नियमावली 2016 में पथ विक्रेताओें को विशेष संरक्षण दिये गये हैं जिसमें अधिनियम का अघ्यारोही प्रभाव (अर्थात अन्य सभी कानूनों के ऊपर लागू होगा), सभी महत्वपूर्ण मामलों का निर्णय पथ विक्रेताओं के 40 प्रतिशत प्रतिनिधित्व वाले नगर फेरी समिति द्वारा होना, पथ विक्रेताओं का नियमावली लागू होने की तिथि 25 मई 2016 से एक माह के अन्दर नगर फेरी समिति द्वारा सर्वे होना, तथा पुनः हर पांच वर्ष में कम से कम एक बार पुनः सर्वे होना, मौजूदा सभी पथ विक्रेताओं को वेंडर जोनों में स्थान उपलब्ध कराना, सर्वे होने तथा सभी लाइसेंस जारी होने तक किसी फड़ या फेरी विक्रेता की बेदखली या पुनः स्थापित करने पर रोक होना, पुलिस और अन्य प्राधिकारियों द्वारा उत्पीड़न पर रोक होना शामिल है। श्री नदीम को नगर निगमों द्वारा उपलब्ध सूचना के अनुसार कुमाऊं के पांचों नगर निगमों में से किसी में भी फड़ फेरी वालों सभी प्रमुख मामलों का निर्धारण करने, (वेडिंग जोन का निर्धारण, लाइसेंस वितरण सहित) वाली नगर फेरी समिति ही कार्यरत नहीं हैं न ही नियम 13 के अन्तर्गत माह में इसकी न्यूनतन एक मीटिंग ही की जा रही हैं। निगमों मे नाम मात्र के फड़ व फेरी व्यवसायियों को ही नगर निगम द्वारा लाइसेंस दिये गये है परन्तु पथ विक्रेताओं से वसूली उसके अनुपात में अत्याधिक है जिससे स्पष्ट है कि अवैध रूप से वसूली तथा नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है। श्री नदीम को काशीपुर नगर निगम के लोेक सूचना अधिकारी द्वारा अपने पत्रांक 946 से उपलब्ध करायी सूचना के अनुसार वर्ष 2024-25 में पंजीकृत पथ विक्रेता 51 हैं जबकि 2025-26 में सूचना उपलब्ध कराने तक शून्य हैं जबकि 2024-25 में 91.25 लाख रूपये शुल्क वसूली करने पर 10.96 लाख खर्च करके वसूला गया है। वर्ष 2025-26 में अक्टूबर 2025 तक 54.28 लाख रूपये शुल्क रू. 6.39 लाख खर्च करके वसूला गया। रूद्रपुुर नगर निगम के लोक सूचना अधिकारी द्वारा पंत्राक 750 से उपलब्ध सूचना के अनुसार 2024-25 में 151 पथ विक्रेता पंजीकृत हैं तथा नवीनीकृत 58 हैं तथा वसूले गये शुल्क की कोई सूचना नहीं उपलब्ध करायी है। हल्द्वानी काठगोदाम नगर निगम के लोक सूचना अधिकारी द्वारा पत्रांक 1862 से उपलब्ध सूचना के अनुसार सर्वे में प्राप्त कुल फेरी व्यवसायियों की संख्या 1826 हैं सूचित किया है। नगर फेरी समिति मासिक मीटिंग तथा कार्यों की तथा शुल्क वसूली की कोई सूचना नहीं उपलब्ध करायी है।
अल्मोड़ा नगर निगम के लोक सूचना अधिकारी द्वारा पत्रांक 40 से उपलब्ध सूचना के अनुसार वर्ष 2024-25 में पंजीकृत पथ विक्रेताओं की संख्या 15 तथा नवीनीकृत 3 दर्शायी है तथा दैनिक तहबाजारी शुल्क का नियमावली से पूर्व 2011 का गजट नोटिफिकेशन उपलब्ध कराया गया है जो नियम विरूद्ध होने के कारण लागू होने योग्य नहीं हैं तथा अवैध हैं।नगर निगम पिथौरागढ़ ने पथ विक्रेताओं के लाइसेंस तथा उनसे वसूले गये शुल्क की कोई सूचना नहीं उपलब्ध करायी हैं। स्पष्ट किय है कि पूर्व में वेडिंग समिति का गठन किया गया है तथा वर्ष 2025 में समिति की बैठक आयोजित नहीं की गयी है।

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