October 9, 2026
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हल्द्वानी। प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन के कार्यक्रम में आमंत्रित केजीसीसीआई द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राज्य के औद्योगिक विकास, निवेश एवं रोजगार संवर्धन हेतु नीतिगत सुधारों के संबंध में एक ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमन्त्री को अवगत कराया गया कि आपके कुशल नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने औद्योगिक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य के उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देने के साथ आर्थिकी में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। तथापि, विषम भौगोलिक परिस्थितियों, बढ़ती उत्पादन व लॉजिस्टिक लागत तथा पड़ोसी राज्यों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण वर्तमान में राज्य के उद्योगों के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न हो गई हैं। राज्य में औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और निवेश को बनाए रखने हेतु कुमायूँ गढ़वाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केजीसीसीआई) द्वारा निम्नलिखित बिन्दुओं पर मुख्यमन्त्री जी का ध्यान आकृष्ट किया गया-औद्योगिक उपयोग हेतु कृषि उत्पादों पर मंडी शुल्क की समाप्ति : राज्य के खाद्य प्रसंस्करण, राइस मिलिंग व कृषि आधारित उद्योगों पर मंडी शुल्क का अतिरिक्त भार है, जिससे पड़ोसी राज्यों की तुलना में उत्पादन लागत बढ़ रही है। अतः औद्योगिक प्रसंस्करण हेतु क्रय किए जाने वाले कृषि उत्पादों पर मंडी शुल्क पूर्णतः समाप्त किया जाए अथवा शत-प्रतिशत छूट दी जाए। सचल दल (Mobile Squads) व्यवस्था की समीक्षा : सड़कों पर वाहनों की बार-बार भौतिक जांच से आपूर्ति बाधित होती है, लॉजिस्टिक लागत बढ़ती है और सामान्य लिपिकीय त्रुटियों पर भी कठोर दंड लगाया जाता है। माँग की गई कि सड़कों पर सचल दलों की नियमित जांच समाप्त की जाए तथा सामान्य तकनीकी त्रुटियों पर दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सुधारात्मक व्यवस्था अपनाई जाए। भूजल निकासी शुल्क का युक्तिकरण : उत्तराखण्ड में भूजल निकासी की दरें पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से अधिक हैं, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो रही है। माँग की गयी कि शुल्क दरों को उत्तर प्रदेश के समान तर्कसंगत बनाया जाए तथा जल संरक्षण, रीसाइक्लिंग व रेन वाटर हार्वेस्टिंग करने वाली इकाइयों को शुल्क में विशेष छूट दी जाए। प्रतिस्पर्धी औद्योगिक विद्युत दरें जल-विद्युत उत्पादक राज्य होने के बावजूद उच्च विद्युत दरें, फिक्स चार्ज एवं पीक आवर अधिभार ऊर्जा-सघन उद्योगों की व्यवहार्यता को प्रभावित कर रहे हैं। माँग की गयी कि औद्योगिक विद्युत दरों व पीक डिमांड शुल्कों की समीक्षा कर पड़ोसी राज्यों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी व स्थिर औद्योगिक टैरिफ लागू किया जाए। सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी का सुदृढ़ीकरण : सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता और रेल फ्रेट सुविधाओं के अभाव से लॉजिस्टिक लागत राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक बैठती है। अतः प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने वाली सड़कों का चौड़ीकरण किया जाए, कुमाऊँ क्षेत्र में रेल परियोजनाओं को प्राथमिकता मिले तथा प्रमुख क्लस्टर्स के पास मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब व फ्रेट टर्मिनल स्थापित किए जाएँ।
BOCW एक्ट के अंतर्गत सेस की गलत डिमांड उद्योगों पर किए जाने के संबंध में : BOCW एक्ट के अंतर्गत उद्योगों पर वर्ष 2002 से 2018 तक नोटिस जारी कर कर भारी भरकम सेस आरोपित कर RC काटने की कार्यवाही की जा रही है जो गैर कानूनी है जिसे तुरंत प्रभाव से रोके जाने की आवश्यकता है इसके कारण उद्योगों में अनिश्चितता और भय का वातावरण बन रहा है। उपर्युक्त विषय राज्य के समग्र आर्थिक विकास, नए निवेश और युवाओं के रोजगार से सीधे जुड़े हैं। अतः संबंधित विभागीय उच्चाधिकारियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आहूत कर इन नीतिगत सुधारों पर समयबद्ध निर्णय लिया जाना चाहिए। इस अवसर पर केजीसीसीआई के महासचिव अश्वनी छाबड़ा एवं पूर्व अध्यक्ष अशोक बंसल उपस्थित थे।

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