October 17, 2026
Screenshot_2026-08-07-11-20-23-92

काशीपुर। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के एक मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/FTSC (पॉक्सो) काशीपुर की अदालत ने सरकारी वकील सीमा रानी की दमदार दलीलों कै सुनकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश रीतेश कुमार श्रीवास्तव ने शुक्रवार को खुले न्यायालय में दण्डादेश सुनाते हुए दोषसिद्ध अभियुक्त फरदीन को कड़ी सजा दी।

कोर्ट ने क्या सजा दी?

न्यायालय ने अभियुक्त फरदीन को पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 6 के तहत दोषी पाते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 50,000 रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। आदेश में कहा गया है कि अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को 6 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

पीड़िता को मिलेगा डेढ़ लाख का प्रतिकर

कोर्ट ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए दो स्तरों पर प्रतिकर का आदेश दिया है।

1. जुर्माने की 50,000 रुपये की राशि पीड़िता को बैंक खाते के माध्यम से प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।
2. पॉक्सो नियम 2020 के नियम-9 के तहत राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि पीड़िता को अतिरिक्त 1 लाख रुपये का भुगतान 30 दिनों के भीतर संबंधित निधि से किया जाए।
इसके लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ऊधम सिंह नगर और जिलाधिकारी को भेजी गई है।

अपील का अधिकार और अन्य निर्देश

न्यायालय ने बीएनएसएस की धारा 468 के तहत अभियुक्त द्वारा जांच और विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया।

अभियुक्त को फैसले की निःशुल्क प्रति उपलब्ध कराने और उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अपील के अधिकार की जानकारी दी गई है। वह हल्द्वानी कारागार अधीक्षक के माध्यम से भी अपील दायर कर सकता है। इसके लिए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अभियुक्त को विधिक सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।

कोर्ट ने इस फैसले की ई-सत्यापित प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला बाल कल्याण समिति, कारागार अधीक्षक हल्द्वानी और जिलाधिकारी को भेजने का आदेश दिया है।

अंत में न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट की धारा 23(2) का हवाला देते हुए मीडिया को निर्देशित किया है कि वह ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाशित न करे जिससे किसी भी प्रकार से पीड़िता की पहचान उजागर हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *