काशीपुर। ब्रह्मलीन श्रीमति आशा अरोरा की आँखें किन्हीं दो लोगो के जीवन में उजाला करेंगी। वसुधैव कुटुम्बकम् के माध्यम से क्षेत्र में 23वां नेत्रदान कराया गया। शिवनगर निवासी श्रीमति आशा अरोरा के देहावसान के पश्चात उनके पति योगराज अरोरा, पुत्र शेखर अरोरा, सचिन अरोरा एवं पवना जी ने नेत्रदान की सहमति प्रदान कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। वसुधैव कुटुम्बकम् के सचिव प्रियांशु बंसल ने बताया कि वसुधैब कुटुम्बकम् क्षेत्र के लोगो में नेत्रदान हेतु जागृति लाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि बहुत से लोग मानते हैं कि नेत्रदान के दौरान उनकी पूरी आंख निकाल दी जाती है, जिससे आंख का सॉकेट खाली रहता है, जो सच नहीं है। आमतौर पर केवल कॉर्निया जो आंख की सबसे बाहरी परत होती है, आसानी से निकाली जाती है। उन्होंने बताया कि नेत्रदान करवाने के लिए वसुधैव कुटुम्बकम् किसी भी समय तैयार है। ब्रह्मलीन श्रीमति आशा अरोरा के नेत्रदान में वसुधैव कुटुम्बकम् के सदस्य अंकित अग्रवाल, समाजसेवी मनीष खरबंदा, समाजसेवी राजकुमार सेठी का विशेष सहयोग रहा।

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