September 2, 2026
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देहरादून। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बीती 8 अगस्त को हुई सभा के बाद शुरू हुआ शुद्धिकरण विवाद अब उत्तराखंड की सियासत में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि रामलीला के मंच से ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे क्यों लगाए गए, लेकिन कांग्रेस ने इसका जवाब देने के बजाय मैदान के शुद्धिकरण को मुद्दा बना लिया। धामी ने कहा कि कुछ धार्मिक संगठनों के लोगों ने मैदान की सफाई और शुद्धिकरण किया, इससे भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी भी कोई सीमा होनी चाहिए।                            ‘रामलीला के मंच से ऐसे नारे क्यों?’ मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की सभा हुई थी। उनके अनुसार, सभा के दौरान ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए गए और वहां गंदगी भी की गई। इसके बाद कुछ धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने वहां सफाई और शुद्धिकरण किया। धामी का सवाल है कि अगर रामलीला के मंच से इस तरह के नारे लगाए गए तो कांग्रेस के नेताओं ने इस पर कभी सवाल क्यों नहीं उठाया?
उन्होंने कहा कि यदि किसी को धार्मिक नारे लगाने हैं तो वह अपने धार्मिक स्थल पर लगाए, लेकिन रामलीला के मंच पर ऐसे नारों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

‘शुद्धिकरण को एससी समाज के अपमान से जोड़ने का क्या आधार?’        शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस की ओर से इसे अनुसूचित जाति समाज और खड़गे के अपमान से जोड़ने पर भी मुख्यमंत्री ने सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप है कि खड़गे के कार्यक्रम के बाद मैदान का शुद्धिकरण किया जाना दलित समाज का अपमान है। कांग्रेस इस मामले में कार्रवाई की मांग कर रही है।धामी ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस के पास इसका कोई सबूत है कि शुद्धिकरण किसी व्यक्ति की जाति को लेकर किया गया था? उन्होंने कहा कि क्या वहां किसी व्यक्ति का नाम लेकर उसका अपमान किया गया?                                ‘कांग्रेस ने बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा’    8 अगस्त की खड़गे की सभा के बाद रामलीला मैदान में हवन और गंगाजल से शुद्धिकरण की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। कांग्रेस इसे दलित अपमान से जोड़ रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि कांग्रेस मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए शुद्धिकरण को राजनीतिक रंग दे रही है। विवाद अब हल्द्वानी से निकलकर देहरादून और दिल्ली तक पहुंच चुका है। कांग्रेस ने राज्यपाल से मामले की जांच की मांग की है और अब 1 सितंबर को सचिवालय घेराव का ऐलान भी किया है।

‘कांग्रेस को हर काम से परेशानी होती है’ धामी ने इस विवाद को सरकार के दूसरे फैसलों से भी जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में युवाओं को सरकारी नौकरी मिल रही है तो कांग्रेस को परेशानी है, यूसीसी लागू हो रहा है तो परेशानी है, नकल विरोधी कानून बना तो परेशानी हुई, मदरसा बोर्ड को खत्म कर शिक्षा बोर्ड बनाने पर भी परेशानी है और अवैध अतिक्रमण हटाने पर भी विरोध होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ‘देवभूमि के देवत्व’ को बचाने के लिए काम कर रही है, लेकिन कांग्रेस को इसमें भी परेशानी हो रही है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जब भी देश और प्रदेश में संस्कृति की बात आती है तो पार्टी तुष्टीकरण की राजनीति पर उतर आती है।

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