March 6, 2026

केजीसीसीआई अध्यक्ष ने की उत्तराखण्ड के उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक अवसर देने हेतु मण्डी शुल्क यूपी की तर्ज पर 1.5 प्रतिशत करने की मांग

काशीपुर। कुमायूँ गढ़वाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री (केजीसीसीआई) ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक पत्र प्रेषित कर राज्य के कृषि आधारित उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए मण्डी शुल्क एवं विकास उपकर की दरों में संशोधन की माँग की है। चैम्बर अध्यक्ष अशोक बंसल ने बताया कि उत्तराखण्ड में मण्डी शुल्क एवं विकास उपकर की दरें उत्तर प्रदेश की तुलना में अधिक हैं, जिससे राज्य के राइस मिल, फ्लोर मिल, फ्रोजन फूड, मसाला प्रसंस्करण एवं प्लाईवुड जैसे उद्योगों की लागत बढ़ जाती है और वे प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मण्डी शुल्क घटाकर 1.5 प्रतिशत किए जाने एवं नए कृषि आधारित उद्योगों को छूट देने से वहाँ निवेश आकर्षित हो रहा है, जबकि उत्तराखण्ड के उद्योग पिछड़ रहे हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य की मण्डी समितियों द्वारा बाहर से लाए गए कच्चे माल (द्वितीय आवक) पर मण्डी शुल्क/विकास उपकर की वसूली की जा रही है, जो उच्चतम न्यायालय के आदेश (दिनांक 09.12.2015) एवं संविधान के प्रावधानों के विपरीत है। केजीसीसीआई की प्रमुख माँगे हैं कि मण्डी शुल्क एवं विकास उपकर की कुल दर अधिकतम 1.5 प्रतिशत (उत्तर प्रदेश की तर्ज पर) निर्धारित की जाए।
नए कृषि आधारित उद्योगों को कम-से-कम 10 वर्षों के लिए मण्डी शुल्क/विकास उपकर से पूर्णतः मुक्त रखा जाए। किसानों से सीधी खरीद करने वाली मैन्युफैक्चरिंग/ प्रसंस्करण इकाईयों को मण्डी शुल्क/विकास उपकर से पूर्णतः छूट दी जाए। द्वितीय आवक (बाहर से लाए गए कच्चे माल) पर मण्डी शुल्क/ विकास उपकर की वसूली तत्काल बंद की जाए। इसके अपेक्षित लाभ बताते हुए चैम्बर अध्यक्ष ने कहा कि इन सुधारों से राज्य में कृषि आधारित उद्योगों को प्रतिस्पर्धी वातावरण मिलेगा, निवेश, उत्पादन, रोजगार एवं राजस्व में वृद्धि होगी तथा किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। चैम्बर ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन एवं किसानों/उद्यमियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करें।

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