April 23, 2026
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काशीपुर। लगभग चार दशक से काशीपुर विधानसभा चुनाव में चला आ रहा सत्ता का सूखा इस बार भी खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। दायित्व संभालने के बाद कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल लगातार कांग्रेस को मजबूत करने में जुटी हैं, लेकिन कुछ लोग हैं कि महानगर कमेटी को दरकिनार कर एक समानांतर संगठन चलाते हुए काशीपुर में कांग्रेस को लगातार कमजोर करने की ठाने हुए हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालने में जरा भी हिचकिचाहट महसूस नहीं कर रहे हैं। आपको बता दें कि काशीपुर विधानसभा सीट कांग्रेस के साथ से निकले करीब चालीस वर्ष हो गये हैं। निकाय चुनाव में भी कांग्रेस अपने झंडे नहीं गाढ़ सकी है। लोकसभा सीट भी छिन गई, लेकिन कांग्रेसियों ने इससे कोई सबक नहीं लिया। लगता है उन्हें इसकी आदत पड़ गई है। काशीपुर में टुकड़ों में बंटे कांग्रेसियों के आका सिर्फ यही चाहते हैं कि उन्हें टिकट मिल जाए तो वे अपने पांव आगे बढ़ायें। इसके चलते काशीपुर में कांग्रेस लगातार पिछड़ती जा रही है। कांग्रेस आलाकमान ने अध्यक्ष के तौर पर काशीपुर की बागडोर अलका पाल को सौंपी तो बखेड़ा खड़ा कर दिया गया।‌ इसके बावजूद स्थिति को संभालते हुए अलका पाल ने सभी को एक मंच पर लाने का प्रयास किया, लेकिन अति महत्वाकांक्षी लोगों को इस पर भी आपत्ति है। वे एक मंच पर आने को तैयार नहीं हैं। वे महानगर कांग्रेस के समानांतर कार्यक्रमों में रुचि ले रहे हैं। अभी हाल कांग्रेस में शामिल हुए रुद्रपुर के नेताजी का रविवार को यहां आयोजित कार्यक्रम इसकी बड़ी मिसाल है।‌ अब सवाल ये उठता है कि क्या 40 वर्षों का सूखा आगामी विधानसभा चुनाव में समाप्त हो पाएगा?

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