June 5, 2026
IMG_20260605_195807

काशीपुर। बाजपुर रोड निवासी 84 वर्षीय त्रिलोक सिंह चड्ढा के निधन के बाद उनके परिवार ने मानवता और सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेत्रदान कराया। दिवंगत के पुत्र प्रीत सिंह चड्ढा ने अपने पिता जी की आखें दान करने की इच्छा जताई, जिसके बाद उन्होंने निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान को सूचना दी। संस्थान की टीम डॉ. मनिका शर्मा और श्री मक्रेंदु ने दिवंगत के आवास पर पहुँचकर सफलतापूर्वक कार्निया प्राप्त किए। इस नेत्रदान के माध्यम से अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी आएगी और वे इस सुन्दर संसार को देख सकेंगे। पिछले महीने स्थानीय निवासी स्व. सरबजीत सिंह की आँखें दान की गई थी जिससे यहाँ पर अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिली। निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान प्रशासन ने परिवार की सेवा भावना और सामाजिक जागरूकता की सराहना करते हुए कहा की नेत्रदान महादान है, जो किसी व्यक्ति को नया जीवन देने के सामान है। संस्थान ने लोगों से अपील की कि मृत्यु के बाद नेत्रदान के लिए आगे आयें, ताकि हजारों नेत्रहीनो लोगों के जीवन में उजाला लाया जा सके।

नेत्रदान के लिए आवश्यक बातें :

मृत्यु के छह घंटें के भीतर आँखें दान की जा सकती हैं। इस दौरान मृतक की आँखें बंद रखनी चाहिए, उन पर गीली रुई रखनी चाहिये तथा कमरे में पंखा बंद और यदि संभव हो तो एसी चालू रखना चाहिए। सिर के नीचे तकिया रखने से भी प्रक्रिया में सहायता मिलती है।
नेत्रदान करने के लिए संपर्क कर सकतें हैं | +91-9837607526

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *