April 24, 2026
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काशीपुर। मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) एवं फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (FOGSI) द्वारा एक महत्वपूर्ण संयुक्त शैक्षणिक एवं कार्यान्वयन पहल का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में 700 से अधिक प्रतिभागियों का पंजीकरण हुआ, जो इस पहल की व्यापक स्वीकार्यता और आवश्यकता को दर्शाता है। कार्यक्रम में देश एवं राज्य के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों में मुख्य वक्ता (Keynote Speakers) डॉ. अशोक के. देओरारी, डॉ. जया चतुर्वेदी, विशिष्ट अतिथि एवं नेतृत्वकर्ता के रूप में डॉ. अनुपमा फ्यूटेला, स्टेट प्रेसिडेंट, FOGSI, डॉ. राधिका रतूड़ी व डॉ. रवि सहोता, स्टेट प्रेसिडेंट, IAP उत्तराखंड उपस्थित रहे। इस संयुक्त पहल की स्पष्ट रणनीति के अंतर्गत रोडमैप प्रस्तुति देते हुए डॉ. राकेश कुमार द्वारा प्रशिक्षण, प्रोटोकॉल एकरूपता एवं परिणाम आधारित कार्यप्रणाली पर विस्तृत योजना प्रस्तुत की गई। डॉ. आरती ने इस पहल के प्रभाव और व्यवहारिक उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए, जबकि डॉ. राजलक्ष्मी मुंधरा द्वारा सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।आगामी समय में 7 मासिक शैक्षणिक व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। साथ ही जमीनी स्तर पर व्यवहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित होंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मातृ मृत्यु दर (MMR) में कमी,
नवजात मृत्यु दर (NMR) में कमी,
आशा वर्कर्स, नर्सों, पीडियाट्रिशियन एवं गायनेकोलॉजिस्ट का प्रशिक्षण तथा समान एवं वैज्ञानिक प्रोटोकॉल का समन्वय रहा।‌ कार्यक्रम के दौरान विचार व्यक्त करते हुए FOGSI की स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. अनुपमा फ्यूटेला ने कहा कि “माँ की सुरक्षा ही स्वस्थ शिशु का आधार है, और इसके लिए समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। वहीं, IAP उत्तराखंड के स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. रवि सहोता ने इस पहल को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि “अब समय आ गया है कि हम ‘One Mother–One Baby–One Care’ मॉडल के साथ टीम-आधारित चिकित्सा को आगे बढ़ाएं।” उन्होंने कहा कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सशक्त स्वास्थ्य आंदोलन है, जहां माँ और शिशु को केंद्र में रखकर एकीकृत एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा प्रदान की जाएगी।

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