काशीपुर। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, काशीपुर मनोज गर्ब्याल की अदालत ने उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम, 2007 के तहत दर्ज एक मामले में दो आरोपियों को अग्रिम जमानत प्रदान की है। न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार मिश्रा एवं अधिवक्ता सैय्यद आसिफ अली द्वारा प्रस्तुत तर्कों और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद यह आदेश पारित किया है। थाना आईटीआई, काशीपुर में एफआईआर संख्या 132/2026 के अंतर्गत धारा 3/5/11(1) उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम, 2007 के तहत सद्दाम निवासी फरीदनगर, ठाकुरद्वारा जिला मुरादाबाद यूपी तथा जरीफ निवासी गुलड़िया, काशीपुर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोपियों की ओर से न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार मिश्रा और अधिवक्ता सैय्यद आसिफ अली ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि अभियुक्तों का कथित घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्हें घटनास्थल से गिरफ्तार नहीं किया गया तथा उनके कब्जे से कोई आपत्तिजनक सामग्री या अवशेष भी बरामद नहीं हुए। उन्होंने यह भी तर्क रखा कि अभियुक्त जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं और न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन करेंगे। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए मामले को गंभीर प्रकृति का बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने तथा केस डायरी एवं उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने पाया कि अभियुक्तों की गिरफ्तारी मौके से नहीं हुई है और मामला विचारणीय है। इसके बाद न्यायालय ने सद्दाम एवं जरीफ की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में दोनों आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके एवं समान राशि के दो-दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए। साथ ही उन्हें जांच में सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित न करने तथा न्यायालय की अनुमति के बिना देश न छोड़ने की शर्तों का पालन करना होगा।

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