काशीपुर। हालांकि, इनका परिचय कराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन फिर भी यह बताना जरूरी है कि प्रसिद्ध सर्जन डॉ. यशपाल रावत सिर्फ सर्जन ही नहीं हैं, बल्कि एक प्रतिष्ठित कवि भी हैं, जिनकी रचनाएं साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करती हैं। हाल ही में प्रकाशित उनका कविता संग्रह ‘कल्पना ज्योति’ है। यह संग्रह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि एक ऐसे मन की अभिव्यक्ति है जो समाज, राष्ट्र, मानवता और जीवन के विविध रंगों को गहराई से महसूस करता है। संग्रह की भूमिका में डॉ. रावत ने स्वयं स्वीकार किया है कि जीवन यात्रा के दौरान मिले मीठे-कड़वे अनुभवों और अंतरमन में उठने वाले भावों ने उन्हें कविता लेखन की ओर प्रेरित किया। यही कारण है कि संग्रह की कविताएँ बनावटी नहीं लगतीं, बल्कि सीधे हृदय से निकलकर पाठक के मन तक पहुँचती हैं। संग्रह की पहली कविता ‘अभिलाषा’ जीवन के उच्च आदर्शों और आत्मिक उत्कर्ष की आकांक्षा को स्वर देती है। इसमें कवि मनुष्य को संकीर्णताओं से ऊपर उठकर व्यापक मानव कल्याण की दिशा में बढ़ने का संदेश देता है। कविता की भाषा सरल है, लेकिन भाव अत्यंत गंभीर और प्रेरक हैं। ‘भीग जाता मन’ जैसी कविता प्रकृति और संवेदनाओं के सुंदर सामंजस्य को प्रस्तुत करती है। वर्षा के माध्यम से कवि ने मन की भावनाओं और स्मृतियों को अत्यंत सहजता से व्यक्त किया है। कविता में प्रकृति केवल दृश्य नहीं, बल्कि मनःस्थितियों की प्रतीक बन जाती है।
संग्रह की सबसे प्रभावशाली रचनाओं में ‘विचारधर्म’ का उल्लेख विशेष रूप से किया जाना चाहिए। यह कविता मनुष्य को सकारात्मक सोच और कर्मप्रधान जीवन की ओर प्रेरित करती है। कवि यहाँ केवल भावुकता नहीं रचता, बल्कि सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों का संदेश भी देता है। ‘अरुण की लालिमा’ और ‘नया सवेरा’ जैसी कविताओं में आशा, जागरण और नव निर्माण की भावना दिखाई देती है। इन रचनाओं में कवि निराशा के अंधकार के बीच उम्मीद की किरण तलाशता है। समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना इन कविताओं को प्रेरणादायी बनाती है।
संग्रह में शामिल ‘भटकन’ आधुनिक मनुष्य की मानसिक उलझनों और सामाजिक विसंगतियों का चित्रण करती है। वहीं ‘बलिदान’ कविता देशभक्ति और राष्ट्र के लिए समर्पण की भावना से ओतप्रोत है। इन कविताओं में कवि का राष्ट्रीय दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देता है।भाषा और शिल्प की दृष्टि से ‘कल्पना ज्योति’ अत्यंत सहज और संप्रेषणीय कृति है। डॉ. रावत ने कठिन शब्दावली या जटिल प्रतीकों का सहारा नहीं लिया है। उनकी कविताएँ सीधे पाठक से संवाद करती हैं। यही सरलता इस संग्रह की सबसे बड़ी शक्ति है। यद्यपि साहित्यिक दृष्टि से कुछ कविताओं में शिल्पगत परिष्कार की संभावनाएँ दिखाई देती हैं, फिर भी भावों की प्रामाणिकता इन कमियों को गौण बना देती है। ‘कल्पना ज्योति’ यह सिद्ध करती है कि संवेदनशीलता किसी एक पेशे की बपौती नहीं होती। एक सफल सर्जन के भीतर भी एक जागरूक साहित्यकार और संवेदनशील कवि जीवित रह सकता है। डॉ. यशपाल रावत का यह संग्रह जीवन, प्रकृति, राष्ट्र और मानव मूल्यों के प्रति उनकी गहरी आस्था का दस्तावेज है। यह कृति न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए पठनीय है, बल्कि उन सभी पाठकों के लिए प्रेरक है जो जीवन को केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि भावनाओं और संवेदनाओं की दृष्टि से भी देखना चाहते हैं। ‘कल्पना ज्योति’ डॉ. यशपाल रावत की रचनात्मक प्रतिभा का उज्ज्वल परिचय है और काशीपुर की साहित्यिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखी जा सकती है।

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