काशीपुर। पूर्व सांसद स्व. सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया के सोलहवें स्मरण दिवस के अवसर पर श्री गुड़िया की पुत्री डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गुड़िया जी भले ही शरीर से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनकी सादगी और जनसेवा का संकल्प स्वर्णिम अक्षरों में सदैव मन व विचारों में जीवित रहेंगे। दीपिका गुड़िया ने कहा, “16 साल बीत गए, पर ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो। सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया मेरे लिए सिर्फ परिवार के सदस्य नहीं थे, वे एक विचारधारा थे। गरीब की सेवा, किसान का दर्द, और राजनीति में ईमानदारी की विचारधारा। “उन्होंने कहा कि गुड़िया जी ने सिखाया था कि “कुर्सी सेवा के लिए होती है, मेवा के लिए नहीं।” आज जब राजनीति में मूल्यों का क्षरण हो रहा है, तब उनकी सादगी और जमीन से जुड़ाव और भी प्रासंगिक हो जाता है। दीपिका गुड़िया ने बताया, “गुड़िया जी ने काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर समेत पूरे तराई-भावर के विकास का सपना देखा था। रेल लाइन, हाईवे, चीनी मिल, युवाओं के रोजगार, हर मुद्दे को उन्होंने संसद में उठाया। उनका अधूरा सपना पूरा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। “युवाओं से अपील करते हुए दीपिका गुड़िया ने कहा कि “आज की पीढ़ी को गुड़िया जी के जीवन से सीखना चाहिए कि राजनीति में आने का मकसद सिर्फ पद पाना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना है। अंत में उन्होंने कहा, “समय बीत जाएगा, सरकारें आएंगी-जाएंगी, लेकिन सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया का नाम काशीपुर के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।” उनके सिद्धांत ही हमारा मार्गदर्शन हैं।

सह संपादक मानव गरिमा
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