July 12, 2026
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काशीपुर। प्रथम अपर सिविल जज (जू.डि.)/ न्यायिक मजिस्ट्रेट, काशीपुर द्वारा दुर्घटना के आरोपी को युक्तियुक्त संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया है। अप्रैल 2018 में रामपुरम कॉलोनी काशीपुर निवासी आलोक श्रीवास्तव ने थाना आईटीआई काशीपुर में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि उनके पुत्र शिखर श्रीवास्तव को कार सवार महेन्द्र पाल ने टक्कर मार कर घायल कर दिया। कार महेन्द्र पाल चला रहा था। उसके बाद कोर्ट में आलोक, उसके बेटे शिखर और विनायक जिसने एक्सीडेंट देखा था और डॉ. अंकुर अग्रवाल व कौशल भाकुनी समेत कुल सात गवाह पेश हुए। मामले में अधिवक्ता अमरीश अग्रवाल, मुनिदेव विश्नोई और भारत भूषण ने बहस की और कहा कि रिपोर्ट कई दिन बाद हुई। गाड़ी और कोई निशान नहीं मिले। डॉक्टर ने कहा कि चोट एक्सीडेंट की नहीं है गिरने से आ सकती है। तीनों अधिवक्ताओं की बहस सुनकर प्रथम अपर सिविल जज (जू.डि.)/ न्यायिक मजिस्ट्रेट, काशीपुर द्वारा अभियुक्त महेन्द्र पाल पुत्र मलकीत सिंह को धारा-279, 338 एवं 427 भारतीय दण्ड संहिता, 1860 में वर्णित अपराध के अभियोग से युक्तियुक्त संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि अभियुक्त जमानत पर है। अभियुक्त के व्यक्तिगत बन्धपत्र एवं जमानतपत्र निरस्त किये जाते हैं तथा जमानतियों को उनके दायित्वों से उन्मोचित किया जाता है।
अभियुक्त द्वारा दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 437क के अनुपालन में न्यायालय में प्रस्तुत बंध-पत्र एवं प्रतिभूति इस निर्णय की तिथि से छः माह की अवधि तक प्रभावी रहेंगे, तत्पश्चात् अपीलीय न्यायालय में अपील न होने की दशा में स्वतः निरस्त माने जायेंगे।

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