September 17, 2026
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काशीपुर। कांग्रेस जिला/महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन को खुर्द नहीं होने देगी। अपने आवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में अलका पाल ने कहा कि उत्तराखंड सरकार पर जमीनों की हेरफेर का आरोप लगाते हुए अलका पाल ने कहा कि उत्तराखंड में ‘इन्वेस्टमेंट मीट’ के नाम पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने जो किया इससे राज्य की सरकारी जमीनों को बाहर के लोगों को औने-पौने दामों में देने की भूमिका बनाई गई है। उन्होंने कहा कि सिडकुल से लगे छरबा में 325 बीघा जमीन अधिगृहीत की गई थी जिसे छोटे उद्यमियों को कारोबार शुरू करने के लिए दिया जाना था, लेकिन छोटे उद्यमियों को वहां कुछ नहीं मिला। महानगर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि पहले इस जमीन को यूपी के एक शिक्षण संस्थान को देने की कोशिश हुई,लेकिन जब पर्दे के पीछे से डील नहीं हुई तो फिर इसे पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी-UPES बिधौली को दे दिया गया। वर्तमान में इस जमीन का बाजार मूल्य करीब 1.5 करोड़ रुपए/बीघा है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि केवल 37.65 लाख रुपए/बीघे के भाव से इसे पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी को सौंप दिया गया, आखिर क्यों?अलका पाल ने कहा कि सरकार को यह जमीन बेचनी ही थी तो इसकी नीलामी करनी चाहिए थी, और इसे उन लोगों को देनी चाहिए थी, जो लोग वहां संस्थान स्थापित करना चाहते थे। मगर इस मामले में सबसे बड़ा खेल सरकार का ये है कि जिस दिन 325 बीघा जमीन 122.36 करोड़ रुपए में यूनिवर्सिटी को दे दी गई, उससे सिर्फ 3 महीने बाद ही सर्किल रेट Revise कर दिया गया, आखिर क्यों? अलका पाल ने कहा कि अब सरकार नए सर्किल रेट के हिसाब से इस जमीन की कीमत 75.20 लाख रुपए/बीघा हो गई है- यानी जमीन की कीमत 244 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, अगर सर्किल रेट के हिसाब से देखें तो पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने प्रदेश को 122 करोड़ रुपए का चूना लगाया है।

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