काशीपुर। जनजीवन उत्थान समिति के तत्वाधान में श्री जगदीश प्रेरणा भवन के सभागार में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका मुख्य विषय था ”वंदे मातरम गीत स्वतंत्रता संग्राम का महामंत्र बना।” कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित देश की स्वाधीनता संग्राम का महामंत्र यह गीत एक ऐसा उद्घोष था जिसने देश की पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया कि वह देश को स्वतंत्रता दिलाकर भारत माता के स्वप्न को अभिव्यक्त करें। वंदे मातरम गीत केवल अपनी देश के प्रति भावना को प्रदर्शित करता है न कि किसी धर्म के प्रति कोई गलत संदेश देता है परंतु तुष्टिकरण के आगे जिन लोगों ने आजादी के पहले और आजादी के बाद घुटने टेक दिए थे, वह आज भी इस मुक्ति के महामंत्र का विरोध करने से नहीं चूकते।
ताज्जुब की बात है कि वोटों के सौदागर आज भी उस मानसिकता से ग्रस्त हैं, जो मानसिकता उन्हें देश के विरोध के तर्क को बल प्रदान करती है। भारत के राष्ट्रगीत के विरोधी लोग क्या कभी उस कल्पना को साकार करने की चेष्टा फिर से कर सकते हैं जो वर्षों पूर्व आतताइयों ने देश में की थी। आज सवाल मानवीय दृष्टिकोण से देश में सभी धर्म को एक होकर राष्ट्र निर्माण की ओर सजग होना है न कि आतताइयों की नीतियों की सराहना करना। हमें सभी धर्म का सम्मान करना चाहिए। गोष्ठी का संचालन कर रहे अधिवक्ता भास्कर त्यागी ने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान हम सभी भारतवासियों को करना चाहिए। यह हमारा नैतिक कर्तव्य है। हम सब मिलकर विश्व के सबसे सुंदर लोकतांत्रिक देश की गरिमा को विश्व में उद्घोषित करने के लिए राष्ट्रगीत का सम्मान करें। गोष्ठी का समापन वंदे मातरम के उद्घोष के साथ किया गया। गोष्ठी में देवांग मिश्रा एडवोकेट, राम शर्मा, विवेक कुमार मिश्रा एडवोकेट, कर्तव्य मिश्रा एडवोकेट आदि मुख्यतः उपस्थित रहे।

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