March 6, 2026
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काशीपुर। महाशिवरात्रि पर्व पर नगर के प्राचीन श्री मोटेश्वर महादेव मंदिर के समीप मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है, जहां भीमसेन द्वारा स्थापित शिवलिंग, जिसे 12वां उप-ज्योतिर्लिंग (भीमशंकर) माना जाता है, यह विशाल मोटाई के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर डाकिनी राज्य (प्राचीन नाम) में स्थापित है, जहां गुरु द्रोणाचार्य को समर्पित द्रोणसागर और पांडवों से जुड़े ऐतिहासिक स्थल भी हैं। मान्यता है कि इस शिवलिंग को महाबलि भीम ने स्थापित किया था। यह स्थान घने जंगलों (डाकिनी क्षेत्र) में स्थित था, जहां हिडिम्बा रहती थी। यह महाराष्ट्र स्थित भीमशंकर ज्योतिर्लिंग का ही एक रूप माना जाता है, जिसे शिवपुराण में भीमशंकर ज्योतिर्लिंग का कामरूप कहा गया है। मोटेश्वर महादेव मंदिर दूसरी मंजिल पर है। शिवलिंग के चारों ओर तांबे का फर्श बना है। इसे जागेश्वर के एक कारीगर द्वारा बनाया बताया जाता है। शिवलिंग की मोटाई अधिक होने के कारण इसे कोई अपने दोनों हाथों से घेर नहीं पाता है। शिवलिंग अत्यधिक मोटा (विशाल) होने के कारण इसे ‘मोटेश्वर महादेव’ कहा जाता है। यह मंदिर ‘किला’ नामक स्थान पर महादेव नहर के समीप स्थित है, जो प्राचीन गोविषाण (काशीपुर) का हिस्सा है। वर्ष 1980 में सेठ मूलप्रकाश द्वारा इस मंदिर का व्यापक जीर्णोद्धार कराया गया था। महाशिवरात्रि पर प्रतिवर्ष यहां विशाल मेला लगता है, जहां श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लाकर बाबा मोटेश्वर महादेव को अर्पित करते हैं। मंदिर परिसर में भैरव नाथ का मंदिर और एक दिव्य शिव गंगा कुंड भी है। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान शिव ने कहा कि जो भक्त कांवर कंधे पर रखकर हरिद्वार से गंगा जल लाकर यहां चढ़ाएगा, उसे मोक्ष मिलेगा। इसी मान्यता के कारण शिवभक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर यहां कांवर चढ़ाते हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी को है।‌ ऐसे में कल शनिवार मध्यरात्रि से जलाभिषेक का क्रम शुरू हो जाएगा। इसे लेकर तैयारियां की जा रही हैं।

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