काशीपुर। उत्तरांचल पंजाबी महासभा (उपमा) द्वारा आगामी 14 अगस्त को हरिद्वार स्थित प्रेम नगर आश्रम में “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” का भव्य राज्य स्तरीय आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन एवं उनकी गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होगा।
महासभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजीव घई ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा कर वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले तथा अपना घर-बार, सम्मान और सर्वस्व खोने वाले लाखों भारतीयों के त्याग, बलिदान और पीड़ा को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया। इससे उन परिवारों की वर्षों पुरानी भावनाओं को सम्मान मिला, जिनके पूर्वजों ने विभाजन की असहनीय त्रासदी का सामना किया। श्री घई ने बताया कि उत्तरांचल पंजाबी महासभा वर्ष 2012 से हरिद्वार की पावन हर की पौड़ी पर विभाजन की त्रासदी में दिवंगत हुए पूर्वजों की स्मृति में श्राद्ध, तर्पण एवं सामूहिक अरदास का आयोजन करती आ रही है तथा लगातार यह मांग उठाती रही है कि उनके बलिदान और संघर्ष को इतिहास में उचित स्थान एवं सम्मान मिले। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में सर्वप्रथम वर्ष 2023 में उत्तरांचल पंजाबी महासभा के अनुरोध पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में रुद्रपुर में भव्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 1947 से पूर्व जन्मे 165 वरिष्ठ नागरिकों का वैदिक हवन एवं अरदास के साथ सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री ने उनकी विभाजन काल की स्मृतियाँ सुनीं तथा उस ऐतिहासिक त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को भी जागरूक किया। तब से प्रत्येक वर्ष उत्तराखण्ड सरकार इस दिवस को प्रदेश के विभिन्न नगरों में आयोजित कर इसकी ऐतिहासिक महत्ता को जन-जन तक पहुँचा रही है। इसी क्रम में इस वर्ष का राज्य स्तरीय आयोजन हरिद्वार में होगा।
कार्यक्रम में 1947 से पूर्व जन्मे उन वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किया जाएगा, जिनका जन्म विभाजन से पूर्व वर्तमान पाकिस्तान में हुआ था। साथ ही गंगा तट पर हवन, सामूहिक अरदास, दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु दीपदान तथा विभाजन की पीड़ा और बलिदान को दर्शाने वाली विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। उत्तरांचल पंजाबी महासभा की सभी नगर इकाइयाँ अपने-अपने नगरों से बसों द्वारा परिवारों के आने-जाने की समुचित व्यवस्था कर रही हैं, ताकि अधिक से अधिक परिवार इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागी बन सकें।
श्री घई ने प्रदेश के सभी विभाजन पीड़ित परिवारों से आग्रह किया है कि वे अपने नगर के उत्तरांचल पंजाबी महासभा के अध्यक्ष अथवा पदाधिकारियों से शीघ्र संपर्क कर अपनी यात्रा की बुकिंग करवाएँ। साथ ही जिन वरिष्ठ नागरिकों का जन्म वर्ष 1947 से पूर्व वर्तमान पाकिस्तान में हुआ है, उनका सम्मान हेतु पंजीकरण अवश्य करवाएँ। आइए, अपने पूर्वजों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को नमन करते हुए इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनें।
महासभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजीव घई ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा कर वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले तथा अपना घर-बार, सम्मान और सर्वस्व खोने वाले लाखों भारतीयों के त्याग, बलिदान और पीड़ा को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया। इससे उन परिवारों की वर्षों पुरानी भावनाओं को सम्मान मिला, जिनके पूर्वजों ने विभाजन की असहनीय त्रासदी का सामना किया। श्री घई ने बताया कि उत्तरांचल पंजाबी महासभा वर्ष 2012 से हरिद्वार की पावन हर की पौड़ी पर विभाजन की त्रासदी में दिवंगत हुए पूर्वजों की स्मृति में श्राद्ध, तर्पण एवं सामूहिक अरदास का आयोजन करती आ रही है तथा लगातार यह मांग उठाती रही है कि उनके बलिदान और संघर्ष को इतिहास में उचित स्थान एवं सम्मान मिले। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में सर्वप्रथम वर्ष 2023 में उत्तरांचल पंजाबी महासभा के अनुरोध पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में रुद्रपुर में भव्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 1947 से पूर्व जन्मे 165 वरिष्ठ नागरिकों का वैदिक हवन एवं अरदास के साथ सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री ने उनकी विभाजन काल की स्मृतियाँ सुनीं तथा उस ऐतिहासिक त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को भी जागरूक किया। तब से प्रत्येक वर्ष उत्तराखण्ड सरकार इस दिवस को प्रदेश के विभिन्न नगरों में आयोजित कर इसकी ऐतिहासिक महत्ता को जन-जन तक पहुँचा रही है। इसी क्रम में इस वर्ष का राज्य स्तरीय आयोजन हरिद्वार में होगा।कार्यक्रम में 1947 से पूर्व जन्मे उन वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किया जाएगा, जिनका जन्म विभाजन से पूर्व वर्तमान पाकिस्तान में हुआ था। साथ ही गंगा तट पर हवन, सामूहिक अरदास, दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु दीपदान तथा विभाजन की पीड़ा और बलिदान को दर्शाने वाली विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। उत्तरांचल पंजाबी महासभा की सभी नगर इकाइयाँ अपने-अपने नगरों से बसों द्वारा परिवारों के आने-जाने की समुचित व्यवस्था कर रही हैं, ताकि अधिक से अधिक परिवार इस ऐतिहासिक आयोजन में सहभागी बन सकें।
श्री घई ने प्रदेश के सभी विभाजन पीड़ित परिवारों से आग्रह किया है कि वे अपने नगर के उत्तरांचल पंजाबी महासभा के अध्यक्ष अथवा पदाधिकारियों से शीघ्र संपर्क कर अपनी यात्रा की बुकिंग करवाएँ। साथ ही जिन वरिष्ठ नागरिकों का जन्म वर्ष 1947 से पूर्व वर्तमान पाकिस्तान में हुआ है, उनका सम्मान हेतु पंजीकरण अवश्य करवाएँ। आइए, अपने पूर्वजों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को नमन करते हुए इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनें।

सह संपादक मानव गरिमा
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