April 24, 2026
मानव गरिमा ब्यूरो

काशीपुर। साहित्य दर्पण की मासिक काव्य संध्या का आयोजन मुनेश कुमार शर्मा के सौजन्य से उन्हीं के कविनगर स्थित आवास पर किया गया, जिसकी अध्यक्षता वीके मिश्रा ने जबकि संचालन ओम शरण आर्य चंचल ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र का अनावरण, माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात सुरेंद्र भारद्वाज ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कवियों ने अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। कवि जितेंद्र कुमार कटियार ने “करके कर्म अच्छे मैं दुनिया छोड़ जाऊंगा, दिखा के राह सबको मैं अहसास छोड़ जाऊंगा।”  कवि डॉ सुरेंद्र शर्मा मधुर ने “जब से खोया है दिल कुछ पता ही नहीं, जिंदगी में रहा कुछ मजा ही नहीं।” कवि कैलाश चंद्र यादव ने “जुमले से नहीं चलता हर काम मेरे दोस्त, कभी न कभी खुलना है ये राज मेरे दोस्त।” कवि मुनेश कुमार शर्मा ने “मिले हों हाथ कितनों से कहां दिल से दिल मिलते हैं, स्वर तन्हाइयों के ही भरी महफिल से मिलते हैं।” कवि सुरेंद्र भारद्वाज ने “जिंदगी बहुत खूबसूरत है बस जीना आना चाहिए, हर जख्म की तुरपाई मुमकिन है बस सीना आना चाहिए।” कवि ओम शरण आर्य चंचल ने “हमारी जिंदगी हमको निरंतर आजमाती है, न करती है कभी देरी सुहाना पथ दिखती है।” कवि कुमार विवेक मानस ने “पुराने ख़त दराजों से उठाकर देखता हूं जब, कि मेरा मन भटकता है तुम्हें मैं सोचता हूं जब।” कवि प्रतोष मिश्रा ने “राम ही साध्य हैं, राम आराध्य हैं, राम हैं सारे जग में समाए हुए, राम ही मंत्र हैं, राम पूजन भी हैं, राम हैं फूल पूजा में लाए हुए।” कवि सोमपाल सिंह प्रजापति सोम ने “बड़ी देर लगा दी रघुनंदन यहां अवधपुरी तक आने में, कैसे समझाऊं दिल को मैं न आए ये समझाने में।” कवि शेष कुमार सितारा ने “हे राम तेरा नाम रहे दिल में हमारे, वरदान मांगते हैं दशरथ के दुलारे।” कवि हेमचंद्र जोशी ने “बसंत है उमंग है कि हर तरफ तरंग है, पीत से वसन पहन धरा नवीन रंग में।” कवि वीके मिश्रा ने “जीवन पथ में मेरा रास्ता न रोको, मैं एक पथिक हूं मुझे बहुत दूर जाना है।” काव्य संध्या में राकेश कुमार, श्रीमती रजनी शर्मा, प्रभात कुमार शर्मा, निर्मला शर्मा, सार्थक  आदि उपस्थित रहे।

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