कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आज 23 अप्रैल को लोकतंत्र के पर्व का पहला चरण भारी मौसमी उतार-चढ़ाव के बीच जारी है। 16 जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। एक तरफ आसमान से आग बरस रही है, तो दूसरी तरफ सियासी पारा भी अपने चरम पर है। दक्षिण बंगाल के तीन जिलों में मौसम विभाग ने गंभीर ‘हीट वेव’ (लू) का अलर्ट जारी किया है, लेकिन इसी बीच चुनावी दोपहर में कई जिलों में अचानक बारिश की भी भविष्यवाणी की गई है। इस एक्सट्रीम वेदर के बावजूद बंगाल के मतदाताओं का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पहले चरण में कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कलिम्पोंग, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम बर्धमान, बांकुरा, पुरुलिया, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर और झारग्राम आदि 16 जिलों में मतदान हो रहा है। भीषण गर्मी में एक राजनीतिक रुझान जो सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है, वह है एक खास समुदाय, विशेषकर अल्पसंख्यक और सीएए-एनआरसी से प्रभावित माने जाने वाले सीमांत मतदाता का भारी तादाद में घरों से बाहर निकलना। चिलचिलाती धूप की परवाह किए बिना इनकी लंबी कतारों के पीछे मुख्य रूप से दो कारण माने जा रहे हैं। इस चुनाव में नागरिकता (CAA) और घुसपैठ जैसे मुद्दे हावी रहे हैं। इस समुदाय को लगता है कि उनका एक-एक वोट उनके भविष्य और सुरक्षा की गारंटी तय करेगा। राज्य सरकार की कई योजनाओं के लाभार्थी, गर्मी को मात देते हुए, अपनी राजनीतिक वफादारी या बदलाव की इच्छा को दर्ज कराने के लिए सुबह-सुबह ही बूथों पर पहुंच गए ताकि दोपहर की भीषण लू या बारिश से बचा जा सके।प्रतिकूल मौसम के बावजूद, शुरुआती रुझानों और चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वोटर टर्नआउट (मतदान प्रतिशत) काफी उत्साहजनक है। सुबह 11 बजे तक ही कई बूथों पर भारी मतदान दर्ज किया गया है। दोपहर की बारिश अगर होती है, तो यह वोटिंग की रफ्तार को कुछ घंटों के लिए धीमा कर सकती है, लेकिन शाम के वक्त फिर से भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
“बंगाल का यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए महज एक राज्य का चुनाव नहीं, बल्कि नाक का सवाल बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी ने खुद को टीएमसी के मुख्य विकल्प के तौर पर स्थापित किया है। अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराना और उसमें इजाफा करना पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, खासकर पीएम मोदी और अमित शाह के लिए साख का विषय है। बीजेपी यह साबित करना चाहती है कि बंगाल में उसका उभार कोई ‘तुक्का’ नहीं था, बल्कि वह राज्य की सत्ता में एक स्थायी और मजबूत दावेदार है। भ्रष्टाचार और संदेशखाली जैसे मुद्दों को उठाकर बीजेपी ने टीएमसी को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।”

सह संपादक मानव गरिमा
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