May 8, 2026
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काशीपुर। उत्तराखंड जैसे शान्त माने जाने वाले राज्य में भी उत्तराखंड की आधे से अधिक जेलों में उसकी क्षमता से दुगने तक कैदी बंद है जबकि कुल कैदियों की संख्या पिछले वर्ष की 5521 से 765 की कमी होकर 4812 हो गयी है। यह खुलासा सूचना अधिकार के अन्तर्गत कारागार मुख्यालय द्वारा नदीम उद्दीन को उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ। काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने महानिरीक्षक कारागार (कारागार मुख्यालय) उत्तराखंड से उत्तराखंड राज्य की जेलो में बंदियों की क्षमता तथा वर्तमान में बंद कैदियों की संख्या के सम्बन्ध में सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में मुख्यालय कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग उत्तराखंड के लोक सूचना अधिकारी ने अपने पत्रांक 442 दिनांक 23 फरवरी 2026 से जेलों की क्षमता तथा बंदियों का विवरण उपलब्ध कराया है। इससे पूर्व 07 फरवरी 2025 की सूचना में 2025 में कैदियों की संख्य उपलब्ध करायी गयी है। 23 फरवरी 2026 की श्री नदीम को उपलब्ध सूचना के अनुसार क्षमता से सबसे अधिक लगभग दुगने 141 कैदी 71 क्षमता वाली जिला कारागार नैनीताल में बंद हैं जबकि दूसरे स्थान पर क्षमता के 185 प्रतिशत 189 कैदी 102 क्षमता वाली जिला कारागार अल्मोड़ा में बंद हैं। तीसरे स्थान पर 157 प्रतिशत कैदी 911 कैदी 580 क्षमता वाली देहरादून जेल में बंद हैं। चैथे स्थान पर क्षमता के 152 प्रतिशत 1025 कैदी 675 क्षमता वाली उपकारागार हल्द्वानी जेल में बंद हैं। पांचवें स्थान पर क्षमता के 140 प्रतिशत 772 कैदी 552 क्षमता वाली केन्द्रीय कारागार सितारगंज जेल में बंद हैं। छठे स्थान पर क्षमता के 122 प्रतिशत 298 कैदी 244 क्षमता वाली उपकारागार रूड़की में बंद है।
श्री नदीम को उपलब्ध 23 फरवरी 2026 की सूचना के अनुसार क्षमता से सबसे कम 19 प्रतिशत 56 कैदी 300 क्षमता वाली सम्पूर्णनन्द शिविर (खुली जेल) सितारगंज में बंद हैं जबकि दूसरे स्थान पर क्षमता के 64 प्रतिशत 109 कैदी 169 क्षमता वाली जिला कारागार चमोली में बंद हैं। तीसरे स्थान पर क्षमता के 72 प्रतिशत 108 कैदी 150 क्षमता वाली जिला कारागार पौड़ी में बंद हैं। चैथे स्थान पर क्षमता के 98 प्रतिशत 78 कैदी 80 क्षमता वाली जिला कारागार पिथौरागढ़ में बंद हैं जबकि जिला कारागार टिहरी में क्षमता के अनुरूप 150 कैदी ही बंद है। श्री नदीम को 07 फरवरी 2025 को उपलब्ध सूचना के अनुसार 2025 में क्षमता से सर्वाधिक अधिक 185 प्रतिशत कैदी 102 क्षमता वाली जिला कारागार अल्मोड़ा में 291 कैदी थे। दूसरे स्थान पर क्षमता के 201 प्रतिशत कैदी 71 क्षमता वाली जिला कारागार नैनीताल में 143 कैदी बंद थे। तीसरे स्थान पर क्षमता के 193 प्रतिशत कैदी 580 क्षमता वाली जिला कारागार देहरादून में 1122 कैदी बंद थे। चैथे स्थान पर क्षमता के 187 प्रतिशत कैदी 635 क्षमता वाली उपकारागार हल्द्वानी में 1188 कैदी बंद थे। पांचवें स्थान पर क्षमता के 156 प्रतिशत कैदी 552 क्षमता वाली केन्द्रीय कारागार सितारगंज में 860 कैदी बंद थे। छठे स्थान पर क्षमता के 132 प्रतिशत कैदी 150 क्षमता वाली जिला कारागार टिहरी में 198 कैदी बंद थे। सातवें स्थान पर क्षमता के 131 प्रतिशत कैदी 244 क्षमता वाली रूड़की उपकारागार में 319 कैदी बंद थे। आठवें स्थान पर क्षमता के 126 प्रतिशत कैदी 888 क्षमता वाली जिला कारागार हरिद्वार में 1120 कैदी बंद थे। नवें स्थान पर क्षमता के 107 प्रतिशत कैदी 150 क्षमता वाली जिला पौड़ी में 160 कैदी बंद थे। श्री नदीम को 2025 में उपलब्ध सूचना के अनुसार प्रदेश में केवल दो जेले ही ऐसी थी जिसमें निर्धारित स्वीकृत क्षमता से कम कैदी बंद थे। इसमें एक विशेष जेल सम्पूर्णानन्द शिविर (खुली जेल) इसकी क्षमता 300 कैदियों की थी जबकि इसकी क्षमता के मात्र 15 प्रतिशत 45 कैदी ही इसमें बंद थे। इसके अतिरिक्त सामान्य जेलों में स्वीकृत क्षमता से कम कैदियों वाली एकमात्र जेल जिला कारागार चमोली है। इसमें उसकी क्षमता 169 की अपेक्षा 71 प्रतिशत 120 कैदी ही बंद थे।

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