July 6, 2026
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देहरादून। उत्तराखंड में बच्चों से जुड़े ऑनलाइन यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री के मामलों को लेकर स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सख्त रुख अपनाया है। एसटीएफ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने ऐसे मामलों में लगातार कार्रवाई करते हुए जून 2026 के दौरान राज्य के विभिन्न जनपदों में 52 एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस का कहना है कि बच्चों से संबंधित अश्लील एवं आपत्तिजनक सामग्री के प्रसारण, संग्रहण और साझा करने वाले लोगों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि 2026 में नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। मई माह में भी करीब एक दर्जन मुकदमे दर्ज किए गए थे, जबकि जून में यह संख्या बढ़कर 52 तक पहुंच गई। सभी मामलों में आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने की प्रक्रिया जारी है। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग एप और क्लाउड स्टोरेज जैसी डिजिटल सेवाओं का दुरुपयोग कर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री साझा करने की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे मामलों को अत्यंत गंभीर अपराध मानते हुए प्रत्येक शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बाल यौन शोषण से संबंधित किसी भी फोटो, वीडियो या लिंक को डाउनलोड करना, मोबाइल या क्लाउड में सुरक्षित रखना अथवा किसी अन्य व्यक्ति को भेजना भी कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसटीएफ ने नागरिकों, विशेषकर अभिभावकों से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नियमित नजर रखने की अपील की है। बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, अजनबियों से ऑनलाइन बातचीत के खतरे और निजी जानकारी साझा न करने के बारे में जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है।
पुलिस ने आमजन से कहा है कि यदि किसी को बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री, संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि या किसी भी प्रकार का साइबर अपराध दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन, साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

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