काशीपुर। ऋषिकेश स्थित निर्मल आश्रम आई इंस्टीट्यूट के पदाधिकारियों द्वारा आज बाजपुर रोड निवासी 84 वर्षीय त्रिलोक सिंह चड्ढा के आवास पर पहुंचकर उनके परिवार जनों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर त्रिलोक सिंह चड्ढा के नेत्रदान कराने पर उनकी प्रशंसा करते हुए इसे सराहनीय कार्य बताया। उल्लेखनीय है कि बीती 5 जून को त्रिलोक सिंह चड्ढा के देहावसान के उपरांत उनके पुत्र प्रीत सिंह चड्ढा ने अपने पिता जी की आखें दान करने की इच्छा जताई, जिसके बाद उन्होंने निर्मल आश्रम आई इंस्टीट्यूट को सूचना दी। इंस्टीट्यूट की टीम डॉ. मनिका शर्मा और श्री मक्रेंदु ने दिवंगत के आवास पर पहुँचकर सफलतापूर्वक कार्निया प्राप्त किए। इस नेत्रदान के माध्यम से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी आएगी और वे इस सुन्दर संसार को देख सकेंगे। आज निर्मल आश्रम आई इंस्टीट्यूट के पदाधिकारियों ने परिवार की सेवा भावना और सामाजिक जागरूकता की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति-पत्र सौंपा और कहा कि नेत्रदान महादान है, जो किसी व्यक्ति को नया जीवन देने के सामान है। संस्थान के पदाधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि मृत्यु के बाद नेत्रदान के लिए आगे आयें, ताकि हजारों नेत्रहीनो लोगों के जीवन में उजाला लाया जा सके। इस दौरान सर्व श्री जसपाल सिंह चड्ढा, गुरविंदर सिंह चंडोक, जोगिंदर सिंह कोहली, लाड़ी संधू, गुरुमुख सिंह सेठी, विक्की चड्ढा, अनिल सिंधवानी, प्रहलाद सिंह चड्ढा व सुखप्रीत सिंह चड्ढा आदि उपस्थित रहे।

सह संपादक मानव गरिमा
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